खिलौने निर्मिती उद्योग ( How to setup toys manufacturing business )

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छोटे बच्चे करीबन सभी घरों में होते हैं। बाल मन का हठ पुरा करने के लिए छोटे बच्चों की सबसे पसंद की वस्तु मतलब विविध प्रकार के खिलौने हैं। सस्ते होने दे या महँगे होने दे बच्चे हठी होने के कारण उन्हें जो चाहिए वह खिलौने खरीदकर देने ही पडते हैं । बच्चों को आनंदी देखना इसमें ही अभिभावकों का (माता-पिताओं का) सुख होता है ।

इसके कारण महँगी होनेवाली ॲटोमेटिक खिलौने भी माँ-बाप अपने बच्चों को लेकर देते हैं । ग्रामीण और शहरी भागों मे विविध प्रकार के कम-अधिक मूल्य (कीमतें) होनेवाले खिलौने सर्वत्र बेचे जाते हैं। सर्वत्र माँग होनेवाले और बारह महिने उत्पादन शुरू रखकर अच्छा उत्पादन प्राप्त करके देनेवाला व्यवसाय होने से नवउद्योजक बेरोजगारों ने इस व्यवसाय की तरफ अवश्य मुडना चाहिए।

पैसों की उपलब्धता हो तो स्वयंचलित खिलौने बनाने का उद्योग शुरू कीजिए। इसके लिए कच्चा माल और मशिनरी खरीदने के लिए अधिक भांडवल लगेगा। भांडवल कम हो तो पारंपरिक तरीके से बनाई जानेवाली लकडी, कलाकुसरी के खिलौने बनाने का व्यवसाय कीजिए।

हाल ही में (फिलहाल) प्लास्टीक के खिलौनों को सर्वाधिक माँग हैं। प्लास्टीक खिलौनों के मामूली (छुट्टे) भाग जोडकर, खिलौने निर्मिती उद्योग शुरू कर सकते हैं। खिलौनों मे मेटल से बनाई हुई धातु के खिलौने, प्लास्टीक के खिलौने, रबर के खिलौने, लकडी के खिलौने ऐसे प्रकार होते हैं। विविध वस्तु-प्रदर्शनें, डिस्नी लँड जैसी मनोरंजन की प्रदर्शने-उरूस, मेलां, मॉल्स, खिलौनों की दूकानें, गिफ्ट गॅलरीज इन स्थानों पर खिलौनो को अच्छी माँग होती हैं।

लकड़ी के खिलौनों में प्राणी, पक्षी, मोटारगाडीयाँ, कार्टुन्स के खिलौने इनका समावेश होता हैं। तो रबरी खिलौनों में प्राणियों के विविधरुपी खिलौने गेंद, मुखवटे, रंग-बिरंगी गुडियाँ ऐसे खिलौने तैयार करते हैं। प्लास्टीक के खिलौनों में बड़े आकार के सभी प्रकार की मोटारगाडियों की हूबहू प्रतिकृति, कार्टुन्स के खिलौने, दैनिक उपयोग के चिजों की छोटे आकार की प्रतिकृतियाँ बनाई जाती हैं। तो धातु अथवा मेटल से बनाए गए खिलौने यह संभवत: इलेक्ट्रॉनिक होते हैं।

स्प्रिंगपर चलनेवाली, सेलपर चलनेवाले यह स्वयंलित खिलौने मेटल से बनते हैं। बहुत से खिलौने तैयार करनेवाले उद्योजक खिलौनों के छुट्टे भाग खुद तैयार नहीं करते। तो अलग-अलग उत्पादकों की ओर से खिलौनों के छोटे-बडे पार्ट खरीद लेकर हम खुद असेंबल करते हैं। जोडते हैं। लकडी, रबरी, मेटल, प्लास्टीक खिलौनों के मामूली (छुट्टे) भाग बेचनेवाले बहुतसे होलसेल व्यापारी शहरों में हैं।

उनसे छुट्टे भाग (मामूली भाग) खरीद लेकर थोडे-से कौशल से उसकी जोडनी करके हम यह व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। खिलौने उद्योगों में करीबन सभी प्रकार के खिलौनों के मामूली भाग सस्ते मिलते हैं। तैयार खिलौने अच्छी कीमत से बेचें जाने से उत्पादन खर्चा और बिक्री मूल्य इसमें बडा फर्क पड़ता हैं। इसी कारण खिलौने उद्योगों में नफे का प्रमाण अच्छा हैं।

कम भांडवल में अच्छा नफा देनेवाला उद्योग होने से बेरोजगार नवउद्योजकों ने, महिला वर्ग ने खिलौने तैयार करने के व्यवसाय में प्रवेश किया तो यह व्यवसाय आपके साथ ही आपके पूरे परिवार को रोजगार प्राप्त करके दे सकता हैं।

मार्केट :

खिलौने बिक्री की सबसे बड़ी बाजारपेठ मतलब मेला। साल में एक बार निश्चित हर गाँव में होनेवाले उरूस, माही, मेला, यात्राएँ, स्पर्धा इन स्थानों पर खिलौनों के दूकाने लगानेवाले कुछ खास व्यापारी होते हैं। उन्हें माल दे सकते हैं। सारा जग ही आधुनिक बनने के कारण बच्चों की आदतें और पसंद भी बदलने से अलग- अलग आधुनिक खिलौने तैयार करने का प्रयत्न कीजिए। उसके साथ ही सभी प्रकार के खिलौनों के दुकानों मे, गिफ्ट गैलरी में, मॉल्स, स्टेशनरी की दुकानों मे भी खिलौने बेचे जाते हैं। होलसेल व्यापारियों की ओरसे अच्छे ऑर्डर्स मिलते हैं।

रॉ मटेरियल :

मेटल शीटस, रबर और प्लास्टीक शीटस्, लकडी की पट्टियाँ, स्क्रू, स्प्रिंगा, कीलें, चिकट टेप, गम (गोंद), डिझाईन के नमुने, स्टीकर्स, लेबल्स, पैकिंग सामग्री ऐसा कच्चा माल लगेगा ।

मशिनरी :

सिकींग-मशिन, पावर-प्रेस मशिन, कटींग मशिन, ड्रॉईंग ओव्हन, स्प्रे-पेंटींग पंप, छुट्टे भाग, हाथोडी, स्क्रू-ड्राईव्हर, पैकिंग बॉक्स आदि। .

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