सीएफएल बल्ब ट्यूब चोक्स उद्योग (CFL Bulb Industry )

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विद्युत उपकरणे- साधने यह आज हर घर की अत्यावश्यक बात हैं। प्राचिन काल में घासलेट (मिट्टी के तेल) के दीये प्रकाश के किए इस्तेमाल लिए जाते थे । परंतु आधुनिकीकरण के कारण आज हर घर में बिजली का उपयोग विविध उपकरणो के लिए किया जाता हैं।

 घर में सिर्फ प्रकाश के लिए ही बिजली का उपयोग नहीं होता तो, बिजली पर चलनेवाली अनेक उपकरणों के लिए किया जाता हैं। बिजली न हो तो आज उत्पादीत उद्योगों का उत्पादन बंद पड़ता हैं।

 बिजली न हो तो फॅन (पंखा ), इस्त्री, एसी, कुलर, फ्रीज, मिक्सर जैसी उपकरणों का उपयोग हम नहीं कर सकते । मनुष्य को बिजली के उपकरणों का उपयोग करना इतने आदत का और जरूरत का बन गया हैं कि बिजली के बिना दैनिक जीवन के बहुत-से काम हम कर नहीं सकते ।

 संगणक, झेरॉक्स, टी.वी. इंटरनेट, सिनेमागृहें ऐसी सभी उपकरणे और उनसे संबंधित होनेवाली उपकरणे- साधने बिजली के बिना चल ही नहीं सकते और इसी कारण ही आज ग्रामीण भाग से शहरी भाग तक बिजली का बहुत उपयोग हो रहा है।

 बिजली की माँग प्रचंड होकर भी उस तुलना में हमारे यहाँ बिजली की निर्मिती नहीं होती । सरकार का पिछले कुछ वर्षों में बिजली उत्पादन बढ़ाने की ओर नजर अंदाज हुआ हैं और आज  जहाँ अपारंपारिक स्रोता से बिजली अथवा ऊर्जा निर्मिती के केंद्र खडे हो रहे हैं, वहाँ किसी न किसी तो राजकिय अथवा सामाजिक विरोधों के कारण उन प्रकल्पों के लिए होनेवाला विरोध इसी कारण बिजली की नवनिर्मिती अत्यंत धीरे से और बिजली का उपयोग, बहुत तेजी से हो रहा है।

आपूर्ति और निर्मिती के बीच बहुत बडा फर्क हाने से बिजली पर चलनेवाले उपकरणों के लिए बिजली का प्रश्न निर्माण होने लगा। देश का कितना तो भाग रात को अंधेरे में ही होता हैं। माँग के अनुसार आपूर्ति न होने से बिजली महामंडले बिजली बचत का धोरण स्विकारते हैं।

 ग्रामीण भागो मे तो कुछ-कुछ स्थानों पर दस घंटो से पंद्रह-पंद्रह घंटो तक बिजली की बचत की जाती हैं। बिजली न होने से लोग खेती को पानी नहीं दे सकते । परिणामत खेतीजन्य उत्पादन घटता है।

 रात को बिजली न होने से विद्यार्थी पढ़ाई नहीं कर सकते । घासलेट (मिट्टी का तेल) राशन दूकान से गायब हो गया हैं। इन सब पर विकल्प के रुप में बिजली की बचत हो इसलिए नया संशोधित सी.एफ्.एल्. बल्ब और ट्यूब की निर्मिती हुई।

 प्राचीन काल में हम अपने घर जिन बल्बों का उपयोग करते थे, वे बल्ब साधारणतः साठ वॅट के थे और ट्यूब चालीस वॅट की थी। इसी कारण साधारणतः चार-पाँच कमरों के घरों में तीन-सौ-चार सौं वॅट की बिजली की जरुरत पड़ती थी।

 यह बल्ब और ट्यूब बिजली का भार (दाब) कम-अधिक होने से खराब होते थे। साल में चार-पाँच बार घरों के बल्ब बदलने पड़ते थे। परंतु सी.एफ.एल.बल्ब यह कम-से-कम एक साल तो खराब नहीं होते। उसका उत्पादन करनेवाली कंपनियाँ वैसी ग्यारंटी भी देती हैं।

 सबसे महत्वपूर्ण मतलब यह सी. एफ्. एल. बल्ब दस से पंद्रह वॅट को अत्यंत प्रकाशित होते हैं और स्वच्छ प्रकाश देते हैं । बिजली की भरपूर बचत करते है। सी.एफ.एल. बल्ब, ट्यूब और चोक्स का उत्पादनं किया हो तो आज उनकी बड़े प्रमाण में माँग हैं।

मार्केट :

हर घर में बल्ब, ट्यूब की जरुरत होने से हर घर यही अपना ग्राहक समझकर डोअर टू डोअर  मार्केटींग किया तो दोगुणा फायदा होता हैं। उसके साथ ही सी.एफ्.एल्.बल्ब ट्यूब की उत्पादने बेचनेवाले खास होलसेल व्यापारी भी हैं। इलेक्ट्रीकल दूकाने, स्टेशनरीज, मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोअर्स यहाँ भी इन उत्पादनों की अच्छी माँग हैं । सी.एफ्.एल. बल्ब, ट्यूब की छोटी-छोटी दुकानें और स्टॉल्स हमें रास्तों के किनारे अच्छा व्यापार करते हुए दिखाई देते हैं।

 रॉ मटेरियल :

आयर्न, सोल्डर, पेस्ट, कटर, कंपसुल, पी.सी.बी. बोर्ड, सोल्डींग वायर, स्लीव अॅल्युमिनियम प, पी.व्ही.सी.होल्डर व्हाईट, सीमेंट, चिपको, रिल स्टैंड, टेस्टींग बोर्ड, कंपलीट टुल कीट, अॅल्युमिनियम वायर, कॉपर वॉयर आदि।

 मशीनरी :

हॅल्ड एचपी मोटर, हँड प्रेस, फोर कॉईल वाईंडींग मशीन, डाईज आदि।

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